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जब से

जब से खाया है धोखा तुमसे,मुझे हर निगाह में चोर नज़र आता है; मुड़ जाऊँ चाहे जिधर कहीं, हर रास्ता बस तेरी ओर नज़र आता है। चाहत है कि मिटा दूँ तेरी याद अपने दिल से, पर बस यहीं ये कमबख्त क...

दिल में नफ़रत

दिल में नफ़रत होठों पे प्यार दिखाना ना आया, जो मेरा है मुझे उसपे भी अधिकार जाताना ना आया। लोग कैसे दो चेहरे लेकर जी लेते हैं, दर्द में भी अपने होंठ कसकर सी लेते हैं। मैं तो थक गई ...

सह लूँगी

छुपी हुई है इस उर में असीमित पीडा, जब तुम चाहोगे तो कह दूंगी. उतार रखे हैं बदन से अपने सारे गहने जब तुम आओगे तो पहनूंगी. छोड गये हो मुझको तुम इस दुनिया अनजानी में रह ना जाऊं सज्ज...

बस ये कहने आई हूँ

वंश जाति सब छोड़ के अपने तुझ संग रहने आई हूँ , बिन पर पंछी उड़ता कैसे बस ये कहने आई हूँ. छोड़ के अपने मात-पिता को बांधी तुम संग डोर है , फिर क्यूं दुविधा में रहते तेरे नैना मेरी ओर हैं ? भुला दिया अपना घर आंगन बस तेरी हो जाने को , तुम क्यूँ अपना कहते हो फिर मुझको छोड़ ज़माने को ? बनकर स्त्री (पत्नी) क्या जीवन भर मैं दूजा स्थान कमाऊँगी ? कब आयेगा वो स्वर्णिम दिन जब मैं प्रथम कहलाऊँगी ? भर दोगे आँचल खुशियोँ से बस ये सुनने आयी हूँ , बिन पर पंछी उड़ता कैसे बस ये कहने आयी हूँ. धर्म , गोत्र , और नाम तुम्हारा सब कुछ मैंने अपनाया है , मान के अपना इस जीवन को तेरे योग्य बनाया है. आखिर तुम क्यूँ ना दे पाये वो स्थान जो मैंने तुम्हेँ दिया ? क्या है कारण है क्या बंधन ? जिसने तुमको असहाय किया ? मेरे भी हैँ परिजन , सम्बंधी ; मैं भी नहीँ अनाथ हूँ , सोचा है क्या , मैं छोड़ उन्हेँ कैसे रहती तेरे साथ हूँ ? ना कहती मैं कि छोड़ दो सबको या रह जाओ बस मेरे बनकर , बस मुझको वो छाया दे दो , सह लूँ धूप मैं जिसमेँ तनकर. दो सम्मान बराबर मुझको मैं वो ही लेने आयी हूँ , ...

चाह बैठी हूँ उसे....

दर्द बड़ा है मेरी जिंदगी की सबसे खुबसूरत तस्वीर में चाह बैठी हूँ उसे जो लिखा नहीं तकदीर में। उसकी चाहत तो कोई और है जो शायद खूबसूरत है, पर क्या करूं मुझे उसकी बस उसी की ज़रूरत है...

नहीं

मैंने माना कि गलती की तुमसे मोहब्बत कर के तू ना हुआ मेरा तो भी कोई गिला नहीं; मैं तो सो गयी थी तेरे कांधे पे सर रख कर वो तो तू है जो मुझे ख़्वाब में भी मिला नहीं।

हंसने का बहाना दे दो

रोने के ठिकाने बहुत हैं हंसने का बहाना दे दो। गुन गुन करती फिरती रहूं एक ऐसा फसाना दे दो समझौतों की दुनियां है ये समझौतों के ही रिश्ते हैं तभी हैं डरते इस धरती पर रहने से भी फ...